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|संग्रह=जागते रहो सोने वालो / गोरख पाण्डेय
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फूल हैं गोया मिट्टी के दिल हैं
ज़िन्दगी
जो कभी मात खाए नहीं
और ख़ुश्बू ख़ुशबू हैंजिसको कोई बाँध पाये पाए नहीं
ख़ूबसूरत हैं इतने
कि बरबस ही जीने की इच्छा जगा दें
कि दुनिया को और जीने लायक बनाने की
इच्छा जगा दें.।
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