भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
फाड़ सकता हे जो नासापुटों तक को।
डरातीं नहीं खुशबुएं खुशबुएँ सड़ांध सी
पर डरतीं भी नहीं।
आ गईं अगर लुटाने पर
तो नहीं रह पाएगा अछूता एक भी कोना खुशबुओं से।
उनके पास और है भी क्या सिवा खुशबुएं खुशबुएँ लुटाने के!
बहुत कठिन होगा करना युद्ध खुशबुओं से
बहुत कठिन होगा अगर आ गईं मोरचे पर खुशबुएं।खुशबुएँ।
खुशबुएं खुशबुएँ हमें हम से बाहर लाती हैं।खुशबुएं खुशबुएँ हमसे ब्रह्माण्ड सजाती हैं।खुशबुएं खुशबुएँ हमें ब्रह्माण्ड बनाती हैं।खुशबुएं खुशबुएँ महज खुशबू होती हैं।खुशबुएं खुशबुएँ हमें पृथ्वी-पृथ्वी का खतरनाक खेल खिलाती हैं
और किसी न किसी अन्तराल पर
हमें एकसार करती हैं, हिलाती हैं।
गनीमत है कि अभी अनशन से दूर हैं हमारी खुशबुएं।खुशबुएँ।
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader, प्रबंधक
34,674
edits