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|रचनाकार=ख़ुर्शीद अकरम
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वीराने से काशाने तक
बस एक क़दम की दूरी है
एक क़दम हो सकता है एक साअत का
एक हैवानी उम्र का
या एक नूरी साल का
वीरान रास्ते की पैमाइश के लिए
ख़ुदा ने
फ़रिश्ता मुक़र्रर नहीं किया
</poem>
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वीराने से काशाने तक
बस एक क़दम की दूरी है
एक क़दम हो सकता है एक साअत का
एक हैवानी उम्र का
या एक नूरी साल का
वीरान रास्ते की पैमाइश के लिए
ख़ुदा ने
फ़रिश्ता मुक़र्रर नहीं किया
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