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ऐ लड़की,!क्यों किया फ़ैसला तुझे अब लड़की कहूँ भी तो कैसे ?अब तो बसा लिया है तुमनेमेरे साथ अपने गठबंधन काअपना एक नया संसारजानकर मेरे बारे मेंसमर्पित कर दिया है तुमने अपना वजूदमुझसे मिलकर और बातें समाहित कर थोड़ी-सीक्या सचमुच परख लिया था तुमने मुझे / पूरा का पूराहैक्या सोचकर / रचाई थी किसी को अपनी दुनिया में ।मैं जानता हूँहँसी–ख़ुशी स्वीकार किया है तुमने अपने हाथों यह सबपर नहीं जानताउस मानसिक तनाव,पारिवारिक ख़ुशियों के दबावया सामाजिक स्थितियों के बारे में मेंहदी,जिनको शायद किसी झंझावात की तरहझेला होगा तुमनेलगवाया था अपने बदन पर हल्दी का उबटनइस फ़ैसले से पहले ।डाली थी गले मैंने अपनी छोटी–सी ज़िन्दगी में वरमालासात फेरों बहुत कम अवसर पाए हैं फ़ैसला करने के साथ लिया था मुझसे वादा,सात वचनों कापर मुझे ऐसा लगता हैचौक-चौबारे और पूजकर कुलदेव-देवियाँकि कोई भी फ़ैसला अंतिम नहीं होतारखकर व्रत-उपवास परिणति तो एक और केवल एक हीमन्नतें माँगकर तीर्थों होती है फ़ैसले की कष्टपूर्ण यात्राओं में,गुहार लगाते हुए जिस वर कीलेकिन अवसर अनंत होते हैं ।सैंकड़ों बार मेरे फ़ैसले की थी तुमने कामनामैं क्या वही हूँ?घड़ी अभी आई नहीं !
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