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हिज्जे
}}
खून ख़ून क्यों सफेद सफ़ेद हो गया ?<br>भेद में अभेद खो गया |<br>
बँट गये शहीद, गीत कट गए,<br>
कलेजे में कटार दड़ गई |<br>दूध में दरार पड़ गई |<br><br>
खेतोँ खेतों में बारूदी गंध,<br>
टुट गये नानक के छंद<br>
सतलुज सहम उठी, व्याथित सी बितस्ता है | <br>
वसंत से बहार झड़ गई<br>
दूध में दरार पड़ गई |<br><br>
अपनी ही छाया से बैर,<br>
गले लगने लगे है गैरहैं ग़ैर,<br>खुदकुशी ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता |<br>बात बनाएँ, बिगड़ गई |<br>दूध में दरार पड़ गई |<br>
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