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<poem>
राम दियाल दिया कर हेरो।
प्रवल प्रचण्ड नाथ तुव माया काया कर्म सकल जग खेरो।
अधम उधारन अब सुब कारण कीजे सफल मनोरथ मेरो।
संकट सोंच मोह भ्रम नासन नाम उदार कल्पतरु तेरो।
श्री रघुनाथ सनाथ करो अब चित दे सुनो दीन को टेरो।
जूड़ीराम सरन तक आयो करहु कृपा वर भक्त बसेरो।
</poem>