गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
सुरसती गनपत मनाइब, चरन पखारब हे / मगही
14 bytes added
,
15:19, 11 जून 2015
दूध पूत बढ़े अहियात, पुतर फल पावहिं हे॥23॥
</poem>
{{KKMeaning}}
Sharda suman
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader,
प्रबंधक
35,136
edits