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स्मृति / पृथ्वी पाल रैणा

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झुलसाए भी होंगे ।
धुल गये होंगे सभी शिकवे गिले
जब गगन में मेघमेघ उमड़ आए जो होंगे ।
सारी धरती धुल गई
वर्षा ऋतु में,