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हामी है नेपाली / दिलिप योन्जन

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मेरो भन्नु सगरमाथा, देशको गौरब हो
मेरो साथ धर्ति आकास, सबैको समान हो
चार जात छतिस बर्ण, हामी सबको फुल्बारी
न ठुलो सानो नभेद भाब, हामी है नेपाली।

माछापुच्छ्रे कन्चनजंगा, चादी झै झल-ल
नै मती बाजा थरी२ नाच, देशको पहिचान
दउरा सुरुवाल ढाका टोपी, कम्बरमा खुकुरी
चार जात छतिस बर्ण, हामी सबको फुल्बारी
न ठुलो सानो नभेद भाब, हामी है नेपाली।

हिमाल तराई झर्ना खोलाले, रिदय चुम्दछ
डाफे मुनाल छम२ नाच्दा,स्वर्ग झै लाग्दछ
चौबन्दी चोली चुरा र पोते, नाखैमा बुलाकी
चार जात छतिस बर्ण, हामी सबको फुल्बारी
न ठुलो सानो नभेद भाब, हामी है नेपाली।

</poem>
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