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15:31, 20 दिसम्बर 2017 {{KKGlobal}}
{{KKRachna
|रचनाकार=आन येदरलुण्ड
|अनुवादक=अनुपमा पाठक
|संग्रह=
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{{KKCatKavita}}
<poem>
क्या आप चन्द्रमा को देख पा रहे हैं
चन्द्र किरणें आपको देख रही हैं
एक बकसुआ चाँद को छिपा सकता है
शायद आपके पास वह अंडाकृति न हो
चन्द्र किरणें आपको देख रही हैं
क्या आप चन्द्रमा को देख पा रहे हैं
चन्द्र किरणों को तो बकसुए से अलग पहचाना ही जा सकता है
वो उजली किरण आप सी नहीं है
चन्द्रमा आपको नहीं चाहता.
'''मूल स्वीडिश से अनूदित'''
</poem>
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