539 bytes added,
10:55, 21 दिसम्बर 2017 {{KKGlobal}}
{{KKRachna
|रचनाकार=राजूरंजन प्रसाद
|संग्रह=
}}{{KKCatKavita}}
<poem>
कुछ लोग हैं जो
शब्दों को तोलते हैं
फिर मुह खोलते हैं
सामने बैठे दोस्त से
पूछा मैंने-
कुछ सुना
कहा उसने
जी, समझा
बोलना और सुनना
समय का रिवाज नहीं रहा शायद
</poem>