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|रचनाकार=तारा सिंह
}}
{{KKCatNazm}}<poem>मुसलमान कहता मैं उसका हूँ<br>हिन्दू कहता मैं उसका हूँ <br><br> या ख़ुदा तुम बता क्यों नहीं देते<br>आखिर हिस्सा मैं किसका हूँ<br><br> फ़लक में फँसी है जान मेरी<br>इन्सान हूँ या मैं फ़रिश्ता हूँ<br><br> मंदिर का हूँ या मसजिद का हूँ<br>राम हूँ, रहीम हूँ या मैं ईशा हूँ<br><br> शमां चुप है, आईना परेशां है<br>
आशिक़ शिशदार है, मैं किसका हूँ
</poem>