भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कंटक- पथ / कविता भट्ट

503 bytes added, 10 जनवरी
{{KKGlobal}}
{{KKRachna
|रचनाकार=रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'कविता भट्ट
}}
{{KKCatDoha}}
<poem>
1कोई भी अपना नहीं,ना ही जाने पीर।ओ मन अब तू बावरे,काहे धरे न धीर।।2ऐसे तुम रूठे पिया, ज्यों मावस में चाँदआ जाओ इक बार तो, घोर रात को फाँद।3'''कंटक- पथ पर चल रही, तेरी यादें साथ।''''''कुछ भी जग कहता रहे, तू न छोड़ना हाथ। '''
<poem>