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आज़ादी के परचम के तले ।
वो जंग ही क्या वो अमन ही क्या दुश्मन जिसमें ताराज <ref>नष्ट, बरबाद</ref> न हो
वो दुनिया दुनिया क्या होगी जिस दुनिया में स्वराज न हो
वो आज़ादी आज़ादी क्या मज़दूर का जिसमें राज न हो ।
लो सुर्ख़ सवेरा आता है, आज़ादी का आज़ादी का
गुलनार <ref>फूल की तरह चेहरे वाला</ref> तराना गाता है, आज़ादी का आज़ादी का
देखो परचम लहराता है, आज़ादी का आज़ादी का ।
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