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कवि: [[ डॉ॰ जगदीश व्योम]][[Category:कविताएँ]][[Category: डॉ॰ जगदीश व्योम ]]
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चलो फिर अहिंसा के बिरवे विरबे उगाएँ !
बहुत लहलही आज हिंसा की फसलें
Anonymous user