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|रचनाकार=रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
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नया वर्ष स्वागत करता है, पहन नया परिधान ।
सारे जग से न्यारा अपना , है गणतन्त्र महान ।।

चन्दा, सूरज से उजियारा,
संविधान हम सबको प्यारा ।
आन-बान और शान हमारी,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा ।
लोकतन्त्र पर भारत वाले करते हैं अभिमान ।
सारे जग से न्यारा अपना, है गणतन्त्र महान ।।

शीश मुकुट हिमवान अचल है,
सुन्दर -सुन्दर ताजमहल है ।
गंगा - यमुना और सरयू का
पग पखारता पावन जल है ।
प्राणों से भी मूल्यवान है हमको हिन्दुस्तान ।
सारे जग से न्यारा अपना, है गणतन्त्र महान ।।

स्वर भर कर इतिहास सुनाता,
महापुरुषों से इसका नाता ।
गौतम, गांधी, दयानन्द की,
प्यारी धरती भारतमाता ।
यहाँ हुए हैं पैदा नानक, राम, कृष्ण, भगवान् ।
सारे जग से न्यारा अपना, है गणतन्त्र महान ।।
</poem>
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