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Kavita Kosh से
चमेली के सुगंधित पुष्पहार में
जो मुझे मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
तुम्हारी श्वासों के स्वर - ताल पर
नृत्य करती हुई प्रतीत होती हैं
असंख्य अप्सराएँ