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पागल / लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा

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सन्के मगज छु, सन्के!
यस्तै छ मेरो हाल!
०००
……………………………….
'''[[पागल / लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा / सुमन पोखरेल| यहाँ क्लिक करके इस कविता का एक हिंदी अनुवाद पढ़ा जा सकता है।]]'''
</poem>
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