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Kavita Kosh से
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जब भी तू मेहरबान होता है
दिल मेरा बदगुमान होता है
जीत लेता है दुश्मनों के दिल
रोज ख़तरों से खेलने वाला
हो जो शाइर हक़ीक़तन ऐ 'रक़ीब'
वो ही अहले ज़बान होता है
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