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चूहेदानी में जो रोटी रखता है
चूहे से क्या बहुत मुहब्बत करता है?
बाजू में शमशीर लिए वो फिरता है
बातें मगर अहिंसा की ही करता है
 
चतुर शिकारी माहिर है अपने फ़न में
कैसे एक कबूतर जाल में फँसता है
 
बगुला मछली को चुपचाप गटक जाता
फिर भी वो खुद को साधू ही कहता है
 
भेड़ बकरियाँ जान न पातीं चालाकी
भेड़िया कैसे छुपकर हमला करता है
 
कोई उसकी कुर्सी उससे छीन न ले
एक सफल राजा उस नीति पे चलता है
 
सच्चाई वो सुनने को तैयार नहीं
सावन के अंधे को सब हरिअर दिखता है
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