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अकसर तुझको देखा है कि ताना बुनते
जब कोइ कोई तागा टुट टूट गया या खत्म हुआ
फिर से बांध के
तेरे इस ताने में लेकिन
इक भी गांठ गिराह गिरह बुन्तर की
देख नहीं सकता कोई