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[[Category: कविता]]दिल्ली की सड़कें कितनी विरान वीरान है
यह मैंने जाना
तुम्हारे जाने के बाद
बिखरे केश में ढंक जाता है तुम्हारा चेहरा
चांद और बादल का ऐसा
अलौकिक दष्श्यदृश्य
एक तुम्ही रच सकती हो
एस धरती पर
मैं खत्म हो जाऊंगा एक दिन
तब भी नहीं देख पाऊंगा यह सच।
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