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अंगन में अधिक, विनोद सरसावेंगे॥
'सोमनाथ हरै-हरै, बतियाँ अनूठी कहि,गूढ बिरहानल, की तपनि बुझावेंगे।सबही तैं प्यारे प्रान, प्रानन तें प्यारे पति,पतिँ तैं प्यारे ब्रजपति आज आवेंगे।
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