भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
}}
[[Category:गज़ल]]
<poem>
उसने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया
हिज्र की रात बाम पर माहे-तमाम रख दिया
उसने सुकूतआमद-ए-शब दोस्त की नवीद कू-ए-वफ़ा में भी अपना पयाम रख दिया <br>आम थी हिज्र की रात बाम पर माहेमैनें भी इक चिराग़-सा दिल सर-ए-तमाम शाम रख दिया <br><br>
आमददेखो ये मेरे ख़्वाब थे देखो ये मेरे ज़ख़्म हैं मैनें तो सब हिसाब-ए-दोस्त की नवीद कूजाँ बरसर-ए-वफ़ा में आम थी <br>मैनें भी इक चिराग़-सा दिल सर-ए-शाम रख दिया <br><br>
देखो ये मेरे ख़्वाब थे देखो ये मेरे ज़ख़्म हैं <br>उसने नज़र-नज़र में ही ऐसे भले सुख़न कहे मैनें तो सब हिसाब-ए-जाँ बरसर-ए-आम उसके पाँओं में सारा कलाम रख दिया <br><br>
उसने नज़रशिद्दत-नज़र ए-तिश्नगी में ही ऐसे भले सुख़न कहे <br>भी ग़ैरत-ए-मैकशी रही उसने जो फेर ली नज़र मैनें तो उसके पाँओं में सारा कलाम भी जाम रख दिया <br><br>दिय
शिद्दत-ए-तिश्नगी में भी ग़ैरत-ए-मैकशी रही <br>उसने जो फेर ली नज़र मैनें भी जाम रख दिय <br><br> और "फ़राज़" चाहिये कितनी मुहब्बतें तुझे <br>के माँओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया<br><br/poem>
Delete, KKSahayogi, Mover, Protect, Reupload, Uploader
19,333
edits