गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
हिम्मते-कोताह से दिल तंगेज़िन्दाँ बन गया / आरज़ू लखनवी
14 bytes added
,
18:58, 9 नवम्बर 2009
|रचनाकार=आरज़ू लखनवी
}}
{{KKCatGhazal}}
<poem>
हिम्मते-कोताह से दिल तंगेज़िन्दाँ बन गया।
वर्ना था घर से सिवा इस घर का हर गोशा वसीअ़॥
है यह सब किस्मत की कोताही वगर्ना ‘आरज़ू’।
बढ़के दामाने-तलब से हाथ है उसका वसीअ़॥
</poem>
Dkspoet
Delete, KKSahayogi, Mover, Protect, Reupload, Uploader
19,333
edits