५.
तड़पै है जबकि सीने में उछले हैं दो-दो हाथ
गर दिल यही है ''मीर '' तो आराम हो चुका
६.
सरापा<ref>सिर से पैर तक ,आदि से अन्त तक </ref> आरज़ू<ref>अभिलाषा </ref> होने ने बन्दा<ref>मनुष्य </ref> कर दिया हमको
वगर्ना<ref> अन्यथा </ref> हम ख़ुदा थे,गर दिले-बे-मुद्दआ <ref> अभिलाषा-रहित </ref> होते
७.
एक महरूम<ref>वंचित</ref> चले '' मीर '' हमीं आलम<ref>संसार </ref> से
वर्ना आलम को ज़माने ने दिया क्या-क्या कुछ?
८.
यानी रात बहुत थे जागे सुबह हुई आराम किया
१०.
रख हाथ दिल पर ''मीर '' के दरियाफ़्त<ref>पूछ लिया</ref> कर लिया हाल है
रहता है अक्सर यह जवाँ, कुछ इन दिनों बेताब है