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सुनता हूँ तुम्हारा उच्चारण भास्वर / ओसिप मंदेलश्ताम
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15:25, 21 मार्च 2010
का ए! मैं दोहराता हूँ, मन गुदगुदाता है
कहीं दूर सुन पड़ती है फिर आवाज़ तुम्हारी-
इस धरती से
आख़्र
आख़िर
कुछ मेरा भी नाता है
प्रेम के पंख होते हैं- लोगों का कहना है
अनिल जनविजय
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