भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
Changes
Kavita Kosh से
<poem>
पशुओं से मृदु चर्म, पक्षियों से ले प्रिय रोमिल पर,
ऋतु कुसुमों से सुरंग सुरँग सुरुचिमय चित्र वस्त्र ले सुंदर,
सुभग रूज़, लिप स्टिक, ब्रौ स्टिक, पौडर से कर मुख रंजित,
अंगराग, क्यूटेक्स अलक्तक से बन नख शिख शोभित;