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''कोई हताश क्यों हो, आती सब की समान वारी है। ''
ध्न्य धन्य कमल, दिन जिसके, धन्य कुमुद, रात साथ में जिसके;
दिन और रात दोनों, होते हैं हाय! हाथ में किसके?
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