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शहर के विरूद्ध / ओम पुरोहित ‘कागद’
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20:45, 19 जुलाई 2010
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|रचनाकार=ओम पुरोहित कागद
|संग्रह=आदमी नहीं हैं / ओम पुरोहित कागद
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poem
Poem
>बहुत कुछ पाने की चाह में
सब कुछ गंवा बैठा
रामअवतार।
अनिल जनविजय
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