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Kavita Kosh से
सच कहता हूँ मित्र हिमालय, जग में नहीं पिघलते लोग ।
आलीशान इबदातखाने इबादतख़ाने लेकिन इनमें आए कौन
दहशत के मौसम में अपने घर से नहीं निकलते लोग ।