भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
<poem>
मेरे मन-मिरगा नहीं मचल
हर दिशि केवल मृगजल -मृगजल!
प्रतिमाओं का इतिहास यही
खौलते हुए उन्मादों को
अनुप्रास बने अपराधों को
निश्चित है बांध बाँध न पाएगाझीने-से रेशम का आंचलआँचल!
भींगी भीगी पलकें भींगा भीगा तकिया
भावुकता ने उपहार दिया
सिर माथे चढा इसे भी तू
ये तेरी पूजा का प्रतिफल!
</poem>
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader
54,035
edits