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वृद्धावस्था में झगड़े / सरिता शर्मा / विलियम बटलर येट्स

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उसकी मिठास कहाँ चली गई थी?
इस अन्धे कटु शहर में,
कट्टरपन्थी क्या ईजाद करते हैं
कल्पना या घटना
जो सोचने के लायक नहीं है,
उन्होंने उसे क्रोधित कर दिया।
मैंने काफ़ी कुछ माफ़ कर दिया था
जिसे बुढ़ापे ने माफ़ कर दिया था।
जो जी चुके हैं वे सब मौजूद रहते हैं;
इतना निश्चित है;
बूढ़े सन्तों को धोखा नहीं दिया गया:
पर्दा के पीछे से कहीं न कहीं
विकृत दिनों में से
सिर्फ़ वह बात याद रहती है
जो इन आँखों के सामने चमकी
जिस पर निशाना साधा गया, वसन्त की तरह कुचला गया।

मूल अँग्रेज़ी से सरिता शर्मा द्वारा अनूदित

लीजिए अब पढ़िए यही कविता मूल अँग्रेज़ी में
QUARREL IN OLD AGE

WHERE had her sweetness gone?
What fanatics invent
In this blind bitter town,
Fantasy or incident
Not worth thinking of,
put her in a rage.
I had forgiven enough
That had forgiven old age.
“}All lives that has lived;
So much is certain;
Old sages were not deceived:
Somewhere beyond the curtain
Of distorting days
Lives that lonely thing
That shone before these eyes
Targeted, trod like Spring.