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वो मुलाक़ात का पल याद आया / साग़र पालमपुरी

वो मुलाक़ात का पल याद आया
कब का बिछुड़ा हुआ कल याद आया

दिल को डसने लगी जो तन्हाई
दोस्त ! तू पहले-पहल याद आया

नीले आँचल से झलकता मुखड़ा
देख कर कोई कँवल याद आया

आँख से अश्क-ए-नदामत टपका
तो मुझे गंगा का जल याद आया

बर्फ़ ने ढाँप लिया पर्बत को
तो हमें ताजमहल याद आया

देख बचपन को जवानी बनते
कोई पकता हुआ फल याद आया

फ़स्ल-ए-गुल आई तो हमको ‘साग़र’!
तेरा अंदाज़-ए-ग़ज़ल याद आया.