भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

वो मेरा रकी़ब था यारो / श्याम सखा 'श्याम'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

वो मेरा रकी़ब था यारो
दिल के पर करीब था यारो

चाहतों की चाह थी जिससे
वो लिये ज़रीब था यारो

पागलों सी बातें थी उसकी
फिर जरूर अदीब था यारो

गुम हुआ रकीब जब मेरा
मैं हुआ गरीब था यारो

दोस्त दुश्मनों सा ही तो था
मामला अजीब था यारो

अपने ही हुए थे बेगाने
‘श्याम’बदनसीब था यारो