भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

व्यापारी का दुःख / कात्यायनी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

उसका वह
मोलभाव नहीं कर सका।
चकित था
तमाम चीज़ों के बीच
उसे पाकर।
विनिमय करता भी तो
किस चीज़ से?
-सोचता रहा
और डण्डी मारता रहा।

रचनाकाल : मई, 2001