भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

शक्ल दरिया की बदल दी / रामश्याम 'हसीन'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

शक्ल दरिया की बदल दी जाएगी
ज़िन्दगी ख़ुशियों के नग़्मे गाएगी

एक पौधा तो लगा हम भी चले
नस्ले-नौ फल-छाँव इससे पाएगी

रोकना चाहो तो ये रुकती नहीं
वक़्त की गाड़ी निकलती जाएगी

बन्द है मुट्ठी तो है ये ज़िन्दगी
रेत-सी वर्ना फिसलती जाएगी

एक को मुश्किल से पाला है 'हसीन'
दूसरी बेटी भी क्या पल पाएगी