भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

शपथ गीत-1 / रमेश रंजक

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

माटी जब कर्ज़ा माँगेगी ख़ून-पसीना देंगे हम
                   वन्दे मातरम । वन्दे मातरम ।

आँधी के हैं पाँव हमारे, हाथ मिले तूफ़ानों के
छोटे-छोटे सीने अपने लेकिन हैं चट्टानों के
किसमें ताक़त है जो रोके अपने बढ़ते हुए क़दम ।
                       वन्दे मातरम । वन्दे मातरम ।।

जिस दिन धरती हमें पुकारे आगे बढ़ते जाएँगे
भारत के बच्चोंं में कितना पानी है दिखलाएँगे
बार-बार तो कभी नहीं आता कुर्बानी का मौसम ।
                        वन्दे मातरम । वन्दे मातरम ।।

अपनी धरती, अपने नभ को अपने सिन्धु-सिवानों को
अपने पर्वत, अपने झरने, अपने नदी-मुहानों को
हम क्यों छोटा होने देंगे जब तक है साँसों में दम ।
                         वन्दे मातरम । वन्दे मातरम ।।