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शबे ग़म को सहर करना पड़ेगा / शहजाद अहमद

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शबे ग़म को सहर करना पड़ेगा
बहुत लम्बा सफ़र करना पड़ेगा

सबा नेज़े पे सूरज आ गया है
ये दिन भी अब बसर करना पड़ेगा

ये आँखें सीपियाँ हैं इसलिए भी
हर आँसू को गोहर करना पड़ेगा

उसे रुखसत ही क्यूँ होने दिया था
ये गम अब उम्र भर करना पड़ेगा

कहा तक दरबदर फिरते रहेंगे
तुम्हारे दिल में घर करना पड़ेगा

अभी तक जिसपे हम पछता रहे हैं
वही बारे दिगर करना पड़ेगा

मुहब्बत में तुम्हे जल्दी बहुत है
ये किस्सा मुक्तसर करना पड़ेगा

बहुत आते हैं पत्थर हर तरफ से
शज़र को बेसमर करना पड़ेगा

अज़ाबे जाँ सही तरके ताल्लुक
करेंगे हम अगर करना पड़ेगा