भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

शब जो दिल बे-करार था क्या था / 'क़ाएम' चाँदपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

शब जो दिल बे-करार था क्या था
किसी का इंतिज़ार था क्या था

चश्म दर पर थी सुब्ह तक शायद
कुछ किसी से करार था क्या था

मुद्दत-ए-उम्र जिस का नाम है आह
बर्क थी या शरार था क्या था

देख मुझ को जो बज़्म से तू उठा
कुछ तुम्हें मुझ से आर था क्या था

रात ‘काएम’ तू उस मिज़ाज पे वाँ
सख़्त बे-इख़्तियार था क्या था