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शाइस्तगी को बीच की दीवार करोगे / रवि सिन्हा

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शाइस्तगी[1] को बीच की दीवार करोगे
मालूम था पहचान से इनकार करोगे

अख़लाक़[2] के तहज़ीब के सौदागरे-जदीद[3]
मालूम था ख़ुद को बहुत ज़रदार[4] करोगे

मशरिक़[5] ज़मीन और है मग़रिब[6] ज़मीन और
दोनों में एक ही फ़सल तैयार करोगे

बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल[7] है दुनिया तिरे आगे
इसको कभी मक़्तल[8] कभी बाज़ार करोगे

परवरदिगार को यहाँ नीचे उतार कर
जम्हूरियत के खेल में किरदार करोगे

शब्दार्थ
  1. सभ्यता (civility)
  2. शिष्टाचार (civilized conduct)
  3. आधुनिक (Modern)
  4. धनी (Wealthy)
  5. पूरब (East)
  6. पश्चिम (West)
  7. बच्चों का खेल (Children's play)
  8. क़त्लगाह (Place of slaughter)