भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

शिकस्त / फ़राज़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


शिकस्त[1]

बारहा[2]मुझसे कहा दिल ने कि ऐ शोब्दागर[3]
तू कि अल्फ़ाज़[4]से अस्नामगरी[5]करता है
कभी उस हुस्ने-दिलआरा[6]की भी तस्वीर बना
जो तेरी सोच के ख़ाक़ों में लहू भरता है

बारहा दिल ने ये आवाज़ सुनी और चाहा
मान लूँ मुझसे जो विज्दान[7]मेरा कहता है
लेकिन इस इज्ज़[8]से हारा मेरे फ़न[9]का जादू
चाँद को चाँद से बढ़कर कोई क्या कहता है

शब्दार्थ
  1. पराजय
  2. कई बार
  3. धोबी
  4. शब्दों
  5. मूर्तिकारी
  6. प्रेमपात्र के सौंदर्य
  7. काव्य रसज्ञता
  8. दुर्बलता
  9. कला