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शिव जी हीरो बनोॅ हो-13 / अच्युतानन्द चौधरी 'लाल'

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लोक गीत

राग काफी-दादरा

पुरुषोॅ से ओढ़ी गुलाबी चदरिया
अइलै सिनुरिया बिहान रे बिहान रे
पनिया भरैलॅ अइलै गामोॅ के गोरिया
चढ़ती जवानी के शान रे शान रे

माथां मटुकिया जी हाथोॅ में डोरिया
धानी चुनरिया सबुज रंग चोलिया
सच लच लचकै छै पतरी कमरिया
नैना के मार छै बान रे बान रे

धरती में लोटै छै लामी लामी केसिया
नाजुक कलैया में हरी हरी चुरिया
सोलह बरस के जी बारी रे उमिरिया
रुपोॅ के बड्डी गुमान रे गुमान रे

चढ़ती जुआनी के जुलमी उमिरिया
तनियोटा हमरोॅ नै मानै छै बतिया
मचलै छै सब कॅ लगावै छै छतिया
दिल छै बड़ा बेइमान बेइमान रे