भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

शिव जी हीरो बनोॅ हो-34 / अच्युतानन्द चौधरी 'लाल'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

होरी-कहरवा

पनियां भरैलॅ केना जइबै रे दैया
रंग अबीर पिचकारी चलै छै।।
सास ननद दोनों जहरोॅ के पुड़िया
बैठी कॅ अंटोॅ भिंसाड़ोॅ पढ़ै छै।।
बिरज के बसिया मोहन रसिया
गालोॅ में अबिर गुलाल मलै छै।।
लाज शरम पतिबरता धरम सखि
फगुआ में सब ए बोहायलॅ कहै छै।।
धरी पकड़ी कॅ मसकावैछै अंगिया
बरजोरी करी करी मुंह चूमै छै।।
ग्वाल बाल सब लाल ॅलालॅ सखि
नाचैछै गावैछै कमाल करै छै।।

हीरा-ताल दीपचन्दी

आबी गेलै फगुआ के दिनमा हे सखि
घरे घर गीत भजनमां हे सखि।
अमुआं मोंजरी गेलै सरसों फुलैलै
हमरोॅ फुलैलै जोबनमां हे सखि।।
नैरर हा में हमरोॅ जी मोॅन केना लागॅ
बाबा नै दै छै गवनमां हे सखि।।
बगिया में कुहु कैछै कारी रे कोइलिया
मारैछै तीर मदनमां हे सखि।।
आबॅ केना लाज शरम सखि बचतै
हम्में नहिं राखबै परनमां हे सखि।।