भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

शिव जी हीरो बनोॅ हो-45 / अच्युतानन्द चौधरी 'लाल'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सोहर

चैत तिथि नौमी अजोध्यां जनम भेलै
शुभ घड़ी शुभ दिन अजोध्यां जनम भेलै
राम लखन जी के भर शत्रुघ्न जी के
चैत तिथि नौमी अजोध्यां जनम भेलै
घरे घर नगरी में अनन्द उमंग सखि
दीया से जगमग सौंसे नगर भेलै
राजा दशरथ जी के खुशी के नै सीमा
हिनका बुढ़पा में चारो ललन भेलै
राजा लुटावैछै अनधन सोनमा
ललना केॅ देखी देखी रानी मगन भेलै
रात दिन गीतोॅ सें बाजा सें नाचोॅ सें
लाल नगरी के लोग सुख में निमग्न भेलै।।

सोहर

सैयां दगरिन बोलाय देॅ जी नै बचभौं हे
सैयां दरदोॅ सें व्याकुल छी नै बचभौं हे
तोरोॅ सैयां हे बड़की बहिन बड़ी दुस्टी
अजी डांड़ो नै तनटा दबावैछौं हे
तोरोॅ सैयां हे मैया बड़ी बेदरदी
हमरा छाती नै तनटा लगावैछौं हे
तोरोॅ सैयां हे चाची बड़ी अलबेली
हुनीं देवतो मनाय लेॅ नै जानैछौं हे
तोरोॅ सैयां हे फुफू बड़ी छौं फूहर
हुनी छौंकी बनायलेॅ नै जानै छौं हे