श्याम का रात-दिन स्मरण चाहिए.
भक्ति में डूबता मन-गगन चाहिए॥
कोई सहजो न मीरा न रसखान ही
सूर को दर्श हित दो नयन चाहिए॥
द्वारिकाधीश जायें करें राज्य भी
राधिका को तो अपना किशन चाहिए॥
गोपियों को न ऐश्वर्य की कामना
बस उन्हें साँवरे का सपन चाहिए॥
था उबारा कन्हैया ने गजराज को
श्याम को भक्त का बस नमन चाहिए॥
अब करूँ भी क्या दौलत या सम्मान का
साँवरे श्याम की जब लगन चाहिए॥
कन्हैया पड़ी द्वार पर हूँ तेरे
अब कृपा का तेरी आचमन चाहिए॥