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श्रद्धा सेवा भाव प्रेम अनुराग रहा ना / शिवदीन राम जोशी

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श्रद्धा सेवा भाव प्रेम अनुराग रहा ना,
कपट पाप पाखंड करे मानव मनमाना।
द्वेष ईर्ष्या जलन मूर्खता छाई जग में,
कंकर कांटे मूढ़ बिछावे सुथरे मग में।
बैर अकारण ही करें करें अनीति घोर,
शिवदीन समय बलवान है चले न कोई जोर।
राम गुण गायरे।