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संकर सुवन गोसैयां, लागूँ तोरे पैयाँ / करील जी

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संकर सुवन गोसैयां, लागूँ तोरे पैयाँ॥धु्रव॥
मूषिक वाहन मोदक भोजन,
भक्तन के पत रखवैया॥लागूँ॥1॥
सेंदुर-रंजित तन अतिशोभित,
माता गौरी के सुखदैया॥लागूँ.॥2॥
ध्यान तिहारो सब सुख सारो,
नामहूँ विघ्न-हरैया॥लागूँ.॥3॥
गन नायक प्रभु सब विधि लायक,
प्रथमहिं पूजन लेवैया॥लागूँ.॥4॥
माँगत दीन ‘करील’ यहै वर,
हिय बसै सतत कन्हैया॥लागूँ.॥5॥