भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सगरै समैया कोसिका हँसी खेलि वितेलिये / अंगिका

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सगरै समैया कोसिका हँसी खेलि वितेलिये
से भादव मासे
कोसीमैया लागै छै पहाड़ से भादव मासे ।
एक ते अन्हार राती दोसर बसात घाती
सूझै नाहीं
मैया गे रेत के बहाव से सूझे नाहीं
मलरि मलरि कोसिका करै अनघोल से नदी बीचे
कोसी मैया मन डरपाय से नदी बीचे ।
फाटल नबेरिया कासिका गून पतबार से टुटि गेलै
मैया गे लागहु गोहारि से दया करू ।
गोड़ लागौ पैया पड़ौ मैया सतवंती से राखि लेहू
मैया गे हमर सोहाग से राखि लेहू ।