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सज्जणाँ दे विछोड़े कोलों / बुल्ले शाह

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सज्जणाँ दे विछोड़े कोलों तन दा लहू छाणीदा।
दुक्खाँ सुक्खाँ कीता एक्का, ना कोई सहुरा ना कोई पेक्का,
दरद विहूणा<ref>खाली</ref> पई दर तेरे, तूँ हैं दरद हन्झाई<ref>हंडाना</ref> दा।
सज्जणाँ दे विछोड़े कोलों तन दा लहू छाणीदा।

कढ्ढ कलेजा करनीआँ बेरे<ref>टुकड़े</ref>, एह भी नहीं लाएक तेरे,
होर तौफीक<ref>ताकत</ref> नहीं विच्च मेरे, पीओ कटोरा पाणी दा।
सज्जणाँ दे विछोड़े कोलों तन दा लहू छाणीदा।

हुण क्यों रोन्दे नैण निरासे, आपे ओड़क फाही फासे,
हुण ताँ छुट्टण औखा होया, चारा नहीं निमाणी दा।
सज्जणाँ दे विछोड़े कोलों तन दा लहू छाणीदा।

बुल्ला सहु प्या हुण गज्जे हश्क दमामा सिर ते वज्जे,
चार दिहाड़े गोएल वासा<ref>वह जगह जहाँ बारिश में घास चरने के लिए गायों को रखा जाता है</ref>, ओड़क कूच नक्कारे दा,
सज्जणाँ दे विछोड़े कोलों तन दा लहू छाणीदा।

शब्दार्थ
<references/>